Horror Story In Hindi | अनजान भुत | Bhutiya Story

दोस्तों Horror Story In Hindi की इस कहानी में हम आपका स्वागत करते है ये कहानी कुछ दोस्तों की है जो कही घुमने जाते है और उनके साथ कुछ ऐसी अनहोनी होती है जिसे वो आगे किसी की बया भी नही कर पाते है उम्मीद करता हूँ यह Bhutiya Story आपको पसंद आएँगी | 

Horror Story In Hindi  अनजान भुत   Bhutiya Story


कुफरी ( भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य के शिमला ज़िले में स्थित एक गाँव व हिल स्टेशन है) में स्कीइंग का लुफ्त उठाने और पूरा दिन मौज मस्ती करने के पश्चात कुमार, कामना, प्रशान्त और पायल शाम को शिमला की ओर बीएमडब्लू में जा रहे थे।

सर्दियों के दिन, जनवरी का महीना, शाम के छ: बजे ही गहरी रात हो गई थी।गोल घुमावदार रास्तों में अंधकार को चीरती, पेड़ो के झुरमुठ के बीच कार चलती जा रही थी। सैलानी ही इस समय सड़कों पर कार चलाते नजर आ रहे थे। टूरिस्ट टैक्सियां भी वापिस शिमला जा रही थी।

कुफरी की ओर इक्का दुक्का कारें ही जा रही थी। बातों के बीच चारों शिमला की ओर बढ़ रहे थे। लगभग आधा सफर कट गया था। कार स्टीरियो की तेज आवाज में हंसी ठिठोली करते हुए सफर का आनन्द उठाते हुए समय का पता नही चल रहा था।

प्रशान्त ने झटकती हुई कार में झूलते हुए कुमार से पूछा, झटके मारते हुए कार क्यों चला रहे हो? 

“प्रशान्त भाई, मैं तो कार ठीक चला रहा हूं, मालूम नही, यह अचानक से झटके क्यों खा रही है?” कुमार ने झटके खाती कार को संभालते हुए कहा। "कार को थोडा साईड करके देख लेते हैं,हो सकता है कि डीजल में कचरा आ गया हो, थोडी रेस दे कर देखता हूं, शायद कार सही हो जाए।

कुमार ने क्लच दबाते हुए कार का ऐक्सीलेटर दबाया, लेकिन कोई खास कामयाबी नही मिली, कार झटके खाती हुई रूक गई।

"अब क्या करे? चारों के मुँह से एक साथ यह शब्द निकला। सभी सोचने लगे, कि काली रात के साए में कुछ भी नजर नही आ रहा था। 

 धीरे धीरे धुन्ध बढ़ रही थी। ठंडक भी धीमे धीमे बढ़ रही थी। कार सड़क की एक साईड पर खड़ी थी। एक-दो कार, टैक्सी आ जा रही थी। प्रशान्त बाहर निकल कर मदद मांगनी पडे़गी। कार में बैठे रहने से कुछ नही होगा। कार तो हम चारों का चलानी आती है, लेकिन कार के मैकेनिक गिरी में चारों फेल है। शायद कोई कार या टैक्सी से कोई मदद मिल जाए। कह कर कुमार कार से बाहर निकला। 

एक ठंडे हवा के तेज झोके ने स्वागत किया। शरीर में झुरझरी सी फैल गई। प्रशान्त भी कार से बाहर निकला। पायल और कामना कार के अंदर बैठे रहे। ठंड बहुत अधिक थी,दिल्ली निवासियों कुमार और प्रशान्त की झुरझरी निकल रही थी। दोनों की हालात दयनीय होने लगी। “थोडी देर खडे़ रहे तो हमारी कुल्फी बन जाएगी।“ कुमार ने प्रशान्त से कहा।

“ठीक कह रहे हो, लेकिन कर भी क्या सकते है।“ प्रशान्त ने जैकेट की टोपी को ठीक करते हुए कहा। "कुमार ने सलाह दी, लिफ्ट मांग कर शिमला चलते है, कार को यहीं छोड़ते है। सुबह शिमला से मैकेनिक ले आएगें। प्रशांत ने कहा "ठीक कहते हो।“

     रात का समय था। गाड़ियों की आवाजाही नगण्य थी। काफी देर बाद एक कार आई। उनको कार के बारे में कुछ नही मालूम था, वैसे भी कार में पांच सवारियां थी। कोई मदद नही मिली।

    दो तीन कारे और आई, लेकिन सभी में पूरी सवारियां थी, कोई लिफ्ट न दे सका। एक टैक्सी रूकी ड्राईवर ने कहा, जनाब मारूती, होंडा, टोएटा की कार होती तो देख लेता, यह तो बीएलडब्लू है, मेरे बस की बात नही है।

    एक काम कर सकते हो, टैक्सी में एक सीट खाली है, पति, पत्नी कुफरी से लौट कर शिमला की ओर जा रहे हैं, उनसे पूछकर एक बैठ कर शिमला तक पहुंच जाओगे। वहां से मैकेनिक लेकर ठीक करवा सकते हो। टैक्सी में बैठे पति, पत्नी ने इजाजत दे दी। कुमार टैक्सी में बैठ कर शिमला की ओर रवाना हुआ। प्रशान्त कार में बैठ गया। प्रशान्त पायल और कामना बातें करते हुए समय व्यतीत कर रहे थे।

    धुन्ध बढ़ती जा रही थी। थोडी़ देर बाद प्रशान्त पेशाब करने के लिए कार से उतरा। कामना, पायल कार में बैठे बोर हो गई थी।

    मौसम का लुत्फ उठाने के लिए दोनों बाहर कार से उतरी। कपकपाने वाली ठंड थी। "कार में बैठो। बहुत ठंड है। कुल्फी जम जाएगी।“ प्रशान्त ने दोनों से कहा।“बस दो मिनट मौसम का लुत्फ लेने दो, फिर कार में बैठते हैं।“ पायल और कामना ने प्रशान्त को कहा। "भूतिया माहौल है कार में बैठते है।“ प्रशान्त ने कहा। प्रशान्त की बात सुन कर पायल खिलखिला कर हंस दी। “भूतिया माहौल नही, मुझे तो फिल्मी माहौल लग रहा है। किसी भी फिल्म की शूटिंग के लिए परफेक्ट लोकेशन है। काली अंधेरी रात, धुन्ध के साथ सुनसान पहाडी़ सड़क। हीरो, हीरोइन का रोमांटिक मूड, रोमांचक गीत। कौन सा गीत याद आ रहा है।

    "तुम दोनों गाओ। मेरा रोमांटिक पार्टनर तो मैकेनिक लेने गया है।"कामना ने ठंडी आह भर कर कहा।

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    तीनों हंस पडे़। तीनों अपनी बातों में मस्त थे। उनको मालूम ही नही पडा़, कि कोई उन के पास आया है। एक शख्स जिसने केवल टीशर्ट, पैंट पहनी हुई थी, प्रशान्त के पास आ कर बोला “आपके पास क्या माचिस है?” इतना सुन कर तीनों चौंक गए। जहां तीनों ठंड में कांप रहे थे, वही वह शख्स केवल टीशर्ट और पेन्ट पहने खडा़ था, कोई ठंड नही लग रही थी उसे। प्रशान्त ने उसे ऊपर से नीचे तक गौर से देख कर कहा। “आपको ठंड नही लग रही क्या?”उसने प्रशान्त के इस प्रश्न का कोई उत्तर नही दिया बल्कि बात करने लगा "आप भूतिया माहौल की अभी बातें कर रहे थे। क्या आप भूतों में विश्वास करते हैं? क्या आपने कभी भूत देखा है?

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    नही, दिल्ली में रहते है, न तो कभी देखा है और न कभी विश्वास किया है, भूतों पर।“ प्रशान्त ने कह कर पूछा, “क्या आप विश्वास करते है? "हम पहाडी़ आदमी है, हर पहाडी़ भूतों को मानते है। उन का अस्तित्व होता है। उस शख्स की भूतों की बाते सुन कर कामना और पायल से रहा नही गया। उनकी उत्सुक्ता बढ गई।,

    भाई, कुछ बताओ, भूतों के बारे में। फिल्मी माहौल हो रखा है, कुछ बातें बताओ। उस शख्स ने कहा “देखिए हम तो मानते है। आप जैसा कह रहे हैं, कि शहरों में भूत नजर नही आते, हो सकता है, नजर नहीं आते होगें मगर पहाडो़ में तो हम अक्सर देखते रहते है। “कहां से आते है भूत और कैसे होते हैं, कैसे नजर आते है।“ प्रशान्त ने पूछा।

    उस शख्स के हाथ में सिगरेट थी, वह सिगरेट को हाथों में घुमाता हुआ बोला “भूत हमारे आपके जैसे ही होते हैं। वे रोशनी में नजर नही आते है। होते कौन है भूत, कैसे बनते है?“ पायल ने पूछा। “यहां पहाडों के लोगों का मानना है, कि जो अकस्मास किसी दुर्घटना में मौत के शिकार होते है,या फिर जिनका कत्ल कर दिया जाता है, वे भूत बनते है। उस शख्स ने कहा। “क्या वे किसी को नुकसान पहुंचाते है या मारपीट करते हैं?” प्रशान्त ने पूछा।

     अच्छे भूत किसी को कुछ नुकसान नहीं पहुंचाते है। अच्छा मैं चलता हूं। सिगरेट मेरे पास है। आप के पास माचिस है, तो दीजिए, सिगरेट सुलगा लेता हूं उस शख्स ने कहा। प्रशान्त ने लाईटर निकाल कर जलाया। उस शख्स ने सिगरेट सुलगाई। लाईटर की रोशनी में सिर्फ सिगरेट नजर आई, वह शख्स गायब हो गया। लाईटर बंद होते ही वह शख्स नजर आया। तीनों के मुहं से एक साथ शब्द निकला–भूत।

    तीनों, प्रशान्त, पायल और कामना का शरीर अकड गया और बेसुध होकर एक दूसरे पर गिर पडे़। अकडा शरीर, खुली आंखें लगभग मृत्य देह के समान तीनों मूर्क्षित थे। वह शख्स कुछ दूरी पर खडा़ सिगरेट पी रहा था। तभी वहां आर्मी का ट्रक गुजरा। उस आदमी ने ट्रक को रूकने का ईशारा किया। ट्रक ड्राईवर उसे देख कर समझ गया, कि वह कौन है। ट्रक से आर्मी के जवान उतरे और तीनों को ट्रक पर डाला और शिमला के अस्पताल में भर्ती कराया।

    कुछ देर बाद कुमार कार मैकेनिक के साथ एक टैक्सी में आया। अकेली कार को देख परेशान हो गया, कि तीनों कहां गये।

    वह शख्स, जो कुछ दूरी पर था, कुमार को बताया, कि ठंड में तीनों की तबीयत खराब हो गई, आर्मी के जवान उन्हें अस्पातल ले गये हैं। कह कर वह शख्स विपरीत दिशा की ओर चल दिया। मैकेनिक ने कार ठीक की और कुछ देर बाद शिमला की ओर रवाना हुए। कुमार सीधा अस्पताल गया। डॉक्टर से बात की। डॉक्टर ने कहा कि तीनों को सदमा लगा है थोड़ी देर अगर ओर यह सभी उस ठंड में रहते तो शायद इन सभी की जान खतरे में आ जाती वैसे घबराने की कोई आवश्कता नही है, लेकिन सदमें से उभरने में समय लगेगा। कुमार को कुछ समझ नही आया, इतनी सी देर में कैसा सदमा , ऐसा क्या हुआ कि ये सभी सदमे में आ गए। अगली सुबह आर्मी ऑफिसर अस्पताल में तीनों को देखने आया। उन्होंने कुमार से कहा – “आई एम कर्नल अरोडा, मेरी यूनिट ने इन तीनों को अस्पातल एडमिट कराया था। कुमार ने पूछा – “मुझे कुछ समझ में नही आ रहा, कि अचानक से क्या हो गया?“

    कर्नल अरोडा ने कुमार को रात की बात विस्तार से बताई, कि एक आदमी हमारे पास आया और उससे इन तीनों की मदद के लिए हमें कहा, जब हमने इन्हें देखा तो सभी बेहोश पड़े थे तो जितना जल्दी हो सकता था हमने इन्हें अस्पताल पहुचाया | कर्नल के जाने के बाद एक व्यक्ति कुमार के पास आता है और बोलता है वो आदमी इन्सान नही भुत था, जिसे देख कर तीनों सदमें में चले गए और बेसुध हो गए। वह एक अच्छा भूत था। अच्छे भूत किसी का नुकसान नही करते। उसने तीनों की मदद की। उसी ने सेना की ट्रक को रोका था जिस जगह पर यह सब हुआ वहां पर पहले भी कई बार ऐसा हो चूका है लेकिन वो भुत हर बार मदद करने आ जाता है अगर आपको लगता है की में झूठ बोल रहा हु तो आप उस जगह के बारे में पता कर सकते है यह सब कुमार बस सुन रहा था इतना बोल कर वह आदमी वहां से चला गया |  

    शाम तक तीनों को होश आ गया। तब तीनों ने अपनी आपबीती बताई तब कुमार ने कहा जहा पर तुम सभी थे वहा ठण्ड धीरे धीरे ज्यादा हो रही थी और थोड़ी देर अगर तुम लोग वहा रहते तो शायद तुम सभी की मोत हो जाती |

    दो दिन बाद अस्पताल से सभी को छुट्टी मिली और सभी दिल्ली वापिस गए, लेकिन जो इन्होने देखा वो ये लोग जिन्दगी भर नही भूल नही पाएंगे । उस घटना को याद करके आज भी उनका बदन ठंडा होने लगता है।

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