👉 Bhutiya Kahani | 1 गर्भवती भूतनी 🔥

दोस्तों इस Bhutiya kahani – गर्भवती भूतनी में आप सभी का स्वागत है यह एक मजेदार Bhutiya Kahani कहानी है यह Bhutiya kahani आपको जरुर पसंद आएँगी. चलिए शुरू करते है हमारी कहानी को .

Bhutiya Kahani | गर्भवती भूतनी
Bhutiya Kahani | गर्भवती भूतनी

👉 Bhutiya Kahani | गर्भवती भूतनी का आरम्भ :

दिवाली का त्योहार था। पूरा गाँव दीपक और मोमबत्ती की रोशनी से जगमगा रहा था। सभी घर के द्वार पर बहुत सारे दिये जल रहे है। गाँव के लोग नये वस्त्र पहनकर दिवाली के त्योहार धूमधाम से मना रहे थे। गाँव की मान्यता के अनुसार लोग मंदिर के द्वार और सीढ़ियों पर दिये लगाने के लिए दिये लेकर जा रहे थे। राधिका जो शहर से दादी के यहाँ आई हुई थी। आस पास की लड़कियों के साथ वो भी मंदिर मे दिये लगाने जा रही थी।

तभी उसकी नजर रास्ते मे एक सुनी झोपड़ी पर पड़ी। दिवाली के दिन वहाँ पर कोई दिया नही जल रहा था। वो अपने साथ चल रही लड़कियों को बिना बताए उस झोपड़ी के बाहर दिये रख दिए। जैसे ही राधिका ने दिया रखा तो एक तेज हवा की झोंके से बुझ गया। राधिका की सहेली की निगाह उस पर गई। वो तुरंत उसे उस झोपड़ी के बाहर लेकर आ गई। अपनी सहेली का इस तरीका का बर्ताव राधिका को बड़ा अजीब लगा।

राधिका ने बोला – क्या हुआ? मुझे इस तरीके से जोर से पकड़कर क्यूँ लाई? दिया बुझ गया है मुझे उसे लगा देने दे। राधिका की सहेली बोली – जिंदा रही तो और ज्यादा दिये लगा देना। फिलहाल यहाँ से जल्दी चल।

राधिका को अपनी सहेली की बात समझ नही आई। फिर वो दोनों वहाँ से चलने लगे। तभी राधिका को पीछे से किसी ने आवाज दी। जैसे ही राधिका ने पीछे देखा एक औरत सफेद रंग की साडी पहनी हुई खड़ी थी। वो गर्भवती भी दिख रही थी। उसने घुघट कर रखा था। तभी तेज हवा आई उसका पल्लू नीचे की तरफ सरक गया। राधिका के देखते देखते वो औरत एक कंकाल मे बदल गई। यह देखकर राधिका बहुत ज्यादा डर गई। डर के मारे वो वही बेहोश हो गई।

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राधिका की सहेली उसे गाव वालो की मदद से उसके दादी के घर ले आई। थोडी देर बाद राधिका को होश आया। राधिका की दादी ने बोला – बेटा! थोड़ी देर पहले तो अच्छी भली थी। अचानक तुझे क्या हुआ?

जैसे ही राधिका अपने दादी को अपने साथ हादसे के बारे मे बता ही रही थी, राधिका की सहेली ने उसके हाथ को जोर से दबाया और बोली- कुछ नही हुआ दादी इसको। आज इसने कुछ खाया नही है ना इसलिए यह गिर गई। शहर की लड़की है ना diet जो करती है। गाव मे रहेगी तो तदरूस्त हो जाएगी।

दादी बोलती – आज से मैं तेरा पूरा ध्यान रखुंगी। मै तुम दोनों के लिए गरमा गर्म हलवा लेकर आती हूँ। यह कहकर वहाँ से चली जाती है।

राधिका को कुछ समझ नही आता। उसने दादी को यह बात क्यूँ नही बताई।

राधिका की सहेली बोली मुझे पता है तेरे मन मे बहुत सारे सवाल चल रहे है। पर मे तुझे इतना बता सकती हू गाँव मे कोई भी उस झोपड़ी के पास नही जाते।

राधिका बोलती है – क्यूँ नही जाते वहाँ पर? ऐसा क्या कारण है जो उस झोपड़ी के पास कोई नही जाता?

राधिका की सहेली बोलती है – गाँव वाले एक कहानी बताते है कि आजादी से पहले इस गाँव मे जमींदारों का राज चलता था। गाँव मे रानी नाम की लड़की रहती थी। जो बहुत ही सुंदर थी। एक दिन जमींदार बेटे की निगाह उस पर पड़ी। उस देखकर उसके प्यार मे पड़ गया। कहाँ वो जमींदार का बेटा कहाँ वो किसान का बेटी। पहले तो जात पात भी हुआ करता था।

रानी बोलती है – ठाकुर साहब! आपका और मेरा कोई मेल नही हो सकता है। आप मेरा पीछा छोड़ दे।

जमींदार का बेटा बोलता है – ऐसे कैसे रानी, मै तुम्हारा पीछा छोड़ दूँ? मैं तुमसे प्यार करता है। और मै तुम्हारे बिना नही रह सकता। हमे कोई भी अलग नही कर सकता

रानी उसकी मिठी मिठी बातों में आ जाती। उस पर भरोसा कर बैठी। दोनों अपनी हद से आगे बढ़ गए। नतीजा रानी गर्भवती हो गई। रानी जब जमींदार के बेटे को बताती है, उसके पेट मे उनका बच्चा पल रहा है। यह सुनकर जमींदार के बेटा बोलता है पता नही,किसका बेटा है तेरे पेट मे, जो मेरे माथे मठ रही है। इतना कहकर जमींदार का बेटा उसका हाथ पकड़कर पंचायत मे लेकर जाता है, और सरपंच को बोलता है देखो सरपंच जी! क्या जमाना आ गया, लड़कियां अब बिन ब्याह माँ बन रही है। यह लड़की अपनी नाजायज औलाद मेरे मथे टेक रही है।

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रानी बोलती है – झूठ बोलने से पहले भगवान से डरो जमींदार। यह तुम्हारी ही औलाद है।

रानी की बातों पर किसी ने विश्वास नही किया। जमींदार के कहने पर रानी को गाँव के बाहर एक झोपड़ी मे रहने के लिए मजबूर कर दिया। रानी का रो रोकर बुरा हाल बन गया। कभी कभी उसे लगता था। वो अपनी जान देदे। लेकिन उसके पेट मे बच्चा होने के कारण वो ऐसा नही करती। वो उस बच्चे को ही अपना सारा संसार मानती थी। रानी अकेली रह रहकर पागल सी हो गई। वो खुद से ही बात करने लगी।

कभी वो दुल्हन की तरह सजने सवरने लगती थी, तो कभी एकदम विधवा की तरह तैयार होकर बैठ जाती। वहाँ से आने जाने लोग उसकी ऐसी हरकत देखकर उससे डरने लग गए। उसकी तरफ जाने भी बन्द कर दिया।

एक रात को जोर से बारिश हुई, बिजली जोरों शोरो से कड़क रही थी। वही रानी का पेट दर्द शुरू होने लग गया। रानी जोर जोर से चिल्लाने लग गई, पर गाव वाले उसकी आवाज़ को अनदेखा कर देते। रानी ने फिर खुद ही अपने बच्चे को जन्म दे दिया। लेकिन उसका बच्चा मरा हुआ पैदा हुआ। रानी अपने बच्चे को देखकर उदास हो जाती है। वो सोचती एक मेरा बच्चा ही था जिसके कारण मे जी रही थी। फिर क्या रानी अपने साडी के पल्लू को छत से बांध कर खुदको फासी लगा देती है।

अगले दिन सुबह होती है, तो सब रानी को देखने के लिए जाते है। लेकिन रानी को वहाँ लटका हुए देखते है। गाँव वालो ने उसका क्रिया कर्म करने का सोचा। लेकिन उसके घर के बाहर एक साँप था, जिन्हे वो लोगो को अंदर ही नही जाने दे रहा था। लोगो ने बहुत कोशिश की, पर किसी को वहाँ जाने ही नही दिया। कुछ दिनों के बाद रानी और उसके बेटा का शरीर कंकाल सा हो गया। रानी की आत्मा वही पर भटकने लगी। अपने बेटे को खो देने का गम उसे जमींदार से बदला लेने के लिए तड़प रही थी।

एक दिन जमींदार के घर पर जमींदार की तेज तेज आवाज़ आ रही थी। उसकी आवाज़ सुनकर सभी गाँव वाले उसके घर पर आ गए। देखा तो उसके घर मे एक आत्मा थी। जो जमींदार की माँ को ऊपर लटका कर रख दिया।

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जमींदार ने उस आत्मा को बोला- मेरी माँ को छोड़ दो।

रानी की आत्मा बोली- तूने मेरे साथ और मेरे बेटे के साथ जो किया उसके लिए मै तुम्हे नही छोड़ुगी। मेरे साथ प्यार का ढोंग रचाकर मेरा इस्तेमाल किया। फिर मुझे धोखा दे दिया।

जमींदार कहता है – मुझसे गलती हो गई मुझे माफ कर दे। जो तेरे पेट मे बच्चा पल रहा था, वो मेरा ही बच्चा था। मैने इस बात से इंकार कर दिया। मेरे से बहुत बड़ी गलती हो गई रानी। मेरी माँ को छोड़ दे। जमींदार की यह बात सुनकर गाव वालो को भी बहुत ही ज्यादा अफसोस हुआ। उन्होंने भी रानी से माफी मांगी।

रानी ने उस जमींदार को माफ नही किया और बोली- मैने अपना बच्चा खोया है। साथ मे अपनी पूरी ज़िंदगी एक कैदी की तरह काटी। मुझे मेरे परिवार से और अपने गाँव से दूर कर दिया। इसके लिए मैं तुझे माफ नही करूँगी।

फिर उस जमींदार को हवा मे घुमा घुमा करके उसे जोर से जमीन पर फेक दिया। जमींदार जमीन पर गिरते ही उसका सिर फट गया। उसी मौके पर उसकी मौत हो गई।
फिर रानी की आत्मा बोलती- जो भी इस गाँव मे किसी को धोखा देगा, मै उसे जिंदा नही छोड़ुगी।

पुरी कहानी सुनकर राधिका ने बोला – यह तो अच्छा ही किया रानी ने। उस जमींदार को उसकी गलती की सज़ा मिलनी ही चाहिए थी।

👉 Bhutiya Kahani | गर्भवती भूतनी का अंत :

दोस्तों उम्मीद करता हूँ की यह Bhutiya kahani | गर्भवती भूतनी आपको पसंद आई होंगी और काफी मजेदार लगी होंगी तो हम जल्द ही मिलते है अपनी अगली कहानी में .

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आवश्यक सुचना :- यह Bhutiya kahani | गर्भवती भूतनी पूरी तरह काल्पनिक है यह Bhutiya kahani किसी भी अन्धविश्वास को बड़ावा देने के लिए नही लिखी गयी है इन्हें सिर्फ मनोरंजन के उद्देश्य से लिखा गया है |

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