👉 Bhutiya Kahani 1 भूतिया रेलवे स्टेशन 🔥

दोस्तों इस Bhutiya kahani 1 भूतिया रेलवे स्टेशन में आप सभी का स्वागत है यह एक मजेदार Bhutiya Kahani कहानी है यह Bhutiya kahani आपको जरुर पसंद आएँगी. चलिए शुरू करते है हमारी इस कहानी को .

Bhutiya Kahani 1 भूतिया रेलवे स्टेशन
Bhutiya Kahani 1 भूतिया रेलवे स्टेशन

Bhutiya Kahani 1 भूतिया रेलवे स्टेशन का आरम्भ :

एक लड़का होता है, जिसका नाम नितिन होता है। जो भोजपुर शहर मे काम करता था। उसे एक दिन काम के सिलसिले मुंबई जाना था। मुंबई जाने के लिए उसे रात को ही ट्रेन मिलती है। दिन मे वो अपना सारा सामान पैक कर देता है, फिर वो स्टेशन के लिए निकल जाता है। जैसे ही भोजपुर स्टेशन पहुँचता है, वहाँ पर उसे कोई भी दिखाई नही देता है। फिर नितिन बोलता है – कितना अजीब है यह स्टेशन, न कोई आदमी दिख रहा है और न ही कोई परिंदा। अब किससे पूछूँ, कि मुंबई वाली ट्रेन कौनसे प्लेटफॉर्म पर आएगी।

नितिन थोड़ा आगे जाकर देखता है, वहाँ उसे एक आदमी दिखाई देता है। जो स्टेशन के एक बोर्ड के पास खड़ा था। उस बोर्ड पर कुछ लिख रहा था।

नितिन उसे आवाज देता है – भाई साहब! यह मुंबई वाली ट्रेन किस प्लेटफॉर्म पर आएगी? हैलो क्या आप मेरी बात सुन रहे हो? नितिन के किसी भी बात का जवाब नही आने पर वो उस शक्स के और पास चला गया। लेकिन उसने जो देखा, उसे देख उसके पैर तले जमीन खसक गई। वो आदमी अपने हाथ को लहूलुहान करके स्टेशन पर लिखे भोजपुर नाम को काट कर उसकी जगह मौतपुर लिख रहा था।

जैसे ही वो आदमी नितिन को देखता है और उसे बोलता है – भाग जा यहाँ से, वो आएगी और तेरे जिस्म को भी चिरते हुए निकल जाएगी। अगर अपनी जान प्यारी है तो यहाँ से चला जा। भाग जा यहाँ से। इतना कहकर वो पागल आदमी खुद ही वहाँ से भाग गया।

तभी नितिन की किसी ने पीठ धपधपाई। नितिन ने हिम्मत करके पीछे मुड़कर देखा। उसके सामने एक आदमी खड़ा था,और वो स्टेशन मास्टर था। उसने नितिन को बोला – कौन हो तुम? इतनी रात को तुम यहाँ क्या कर रहे हो?

यह भी जरुर पढ़े :-

नितिन अपनी टिकट बताते हुए कहता है – यह मेरी टिकट है, मुझे मुंबई जाना है। मुझे यह नही पता यह ट्रेन किस प्लेटफॉर्म पर आएगी। क्या आप मुझे बता सकते हो?
स्टेशन मास्टर साहब – ओ हो! तुम हो वो पहले यात्री। जो इस स्टेशन पर 24 साल बाद अपनी ट्रेन पकड़ेगा।

नितिन – 24 साल बाद यह क्या बोल रहे हो आप?

Bhutiya Kahani 1 भूतिया रेलवे स्टेशनBhutiya Kahani 1 भूतिया रेलवे स्टेशन
Bhutiya Kahani 1 भूतिया रेलवे स्टेशन

स्टेशन मास्टर साहब – हाँ। क्योंकि इन 24 सालो मे इस स्टेशन पर एक भी ट्रेन नही रुकी। अगर रुकी है तो उसने किसी को जिंदा नही छोड़ा।

नितिन – ऐसा क्या हुआ इन 24 साल पहले? कौन किसको जिंदा नही छोड़ नही रहा था? स्टेशन मास्टर साहब मुझे अब डर लग रहा है।

स्टेशन मास्टर साहब – डरते क्यूँ हो? उसने अपना इंतकाम पूरा कर दिया। अब वो किसी को भी नही मारेगी।

चलो मे तुम्हे इस स्टेशन की कहानी सुनाता हूँ। वैसे भी तुम्हारे ट्रेन आने मे अभी वक्त है। आज से 24 साल पहले यहाँ एक स्टेशन मास्टर था। जिसका नाम मोहन था। उसकी एक सरिता नाम की बेटी थी। उसकी उम्र लगभग 19 साल की थी। सरिता अपने पिता का बहुत ख्याल रखती थी। उनके परिवार उन दोनों के अलावा कोई नही था।

दूसरी ओर एक ट्रेन मे तीनो दोस्त सफर कर रहे थे। तीनो दोस्त का नाम रमन अमन और राज था।

राज अमन से कहता है – यार अमन! घण्टो से ऐसे ही चले जा रहे है। क्या बकवास ट्रेन है। हम तीनो के अलावा और कोई भी नही है इस डिब्बे मे।

रमन कहता है – हाँ अमन राज एकदम सही कर रहा है। अरे जब अकेले ही जाना था, तो गाड़ी से ही आ जाते। ट्रेन मे आने की क्या जरूरत थी?

अमन – चुप बैठो तुम दोनों। तुम दोनों की बहुत सुन ली। जिन लड़कियों से बात की थी साथ चलने के लिए। वो तो आई नही। इसमें मे क्या कर सकता हूँ।

राज रमन से कहता है – लड़किया साथ नही आई तो क्या हुआ। रास्ते से किसी को उठा लेंगे। वेसे भी तेरा बाप मिनिस्टर है। तो फिर किस बात का डरना।(हँसते हुए बोला) अमन राज की बातो से सोचने लग जाता है, उसे एक विचार आता है। वो बोलता है – मै तुम लोगो के लिए इंतजाम करता हुं। बहुत ही मजा आएगा।

वही भोजपुर के स्टेशन मास्टर(मोहन) रात को अपनी ड्यूटी कर रहे थे। तभी उनकी बेटी सरिता स्टेशन पर टिफिन और स्वेटर लेकर आती है और अपने पिता को बोलती है आज भी आप सब भूलकर काम पर आ गए ना। अगर मैं ना होती तो आप अपना बिल्कुल भी ख्याल नही रखते।

मोहन – अच्छा हुआ, तु आ गई। वैसे भी मुझे बहुत तेज भूख लगी है। सरिता अपने पिता(मोहन) को टिफिन और स्वेटर पकडाकर बोलती है- रुको मैं पानी लेकर आती हूं। फिर दोनों साथ मे खाएगे। इतना कहकर पानी के लिए बढ़ी थी, तभी वहाँ एक ट्रेन आकर स्टेशन पर रुक गई। जिसमे वो तीन दोस्त सवार थे। वो तीनो दोस्त सरिता को देखते है। देखकर मन ही मन हँसने लगते है।

अमन रमन से कहता है – रमन मौका अच्छा है। लड़की को उठा देते है, वैसे भी न ही कोई स्टेशन पर है, न ही हमारे डिब्बे मे। किसी को कुछ भी पता नही चलेगा। वैसे भी तुम्हारा बाप मिनिस्टर है।

Bhutiya Kahani 1 भूतिया रेलवे स्टेशन
Bhutiya Kahani 1 भूतिया रेलवे स्टेशन

इतना कहकर रमन ट्रेन से उतर जाते है, दबे पैरों से सरिता को दबोच लिया। जबरदस्ती उसे ट्रेन के अंदर ले जा रहा था। उसकी मदद करने के लिए अमन और राज भी आ जाते है। सरिता चीखने लगी पिताजी बचाओ मुझे। यह लोग मुझे जबरदस्ती ट्रेन के अंदर लेकर जा रहे है। सरिता की चीख सुनकर उसके पिताजी सरिता को बचाने के लिए उसके पास जा ही रहे थे, तब तक उन लोगो ने सरिता को ट्रेन के अंदर ले जाकर गेट बन्द कर चुके थे। उसके पिता गेट को पिट पीटकर बोल रहे थे – मेरी बेटी को छोड़ दो। भगवान के लिए मेरी बेटी को छोड़ दो।

मोहन गिडगिडाते ही रहा था, तभी एक हॉर्न के ट्रेन भी चलने लग गई। सरिता खुदको बचाकर खिड़की के पास अपने पिता को बोलने लगी – पिताजी मुझे बचाओ। यह लोग बहुत ही गंदे है। बचाओ मुझे। उसको देखकर उसके पिताजी भी ट्रेन के साथ साथ भागने लगे। तभी उनका पैर फिसल गया। वो ट्रेन के नीचे आ गए, और उनके शरीर के दो टुकड़े हो गए।

ऐसे ही मजेदार कहानियां अगर आप instagram पर पढना चाहते है

तो आप हमारे instagram पेज @Sirf_Horror को Follow कर सकते है |

यह सब देखकर सरिता जोर जोर से रोने लग गई। सरिता को उन लोगो से बच बचाकर ट्रेन के गेट पास आकर खड़ी हो जाती है उन लोगो को बोलती है – जिस तरीके से तुम लोगो ने हमारे साथ किया, मै उसके लिए तुम लोगो कभी भी माफ नही करूँगी। जब तक तुम लोगों के खून से नही नहा लेती। मेरी आत्मा को शांति नही मिलेगी। इतना कहकर वो ट्रेन से कूद जाती है। उसके मौके पर ही मौत हो जाती है।

कहानी सुनते हुए नितिन स्टेशन मास्टर साहब को बोलते हुए कहता है – सरिता तो मर गई। तो उसका बदला कब पूरा हुआ?

स्टेशन मास्टर साहब – सरिता के मरने के बाद उसकी आत्मा इस स्टेशन से गुजरने वाली हर ट्रेन का पीछा करती है। जो भी उसके रास्ते मे आता उन्हे वो चिरकर निकल जाती। इस डर से यहाँ पेसेंजर उतारना भी बन्द कर दिया। धीरे धीरे ट्रेन भी यहाँ रुकने नही लगी।

लेकिन एक रात वही तीनों इसी रास्ते से मुंबई जा रहे थे। सरिता की आत्मा उन तीनों को देख लेती है। ट्रेन को उसी जगह पर रुका देती है। रमन बाहर जाकर देखता है तो उसे वहाँ पिताजी दिखते है। रमन वहाँ उतर जाता है साथ मे उसके दोस्त भी। सरिता की आत्मा ने यह सब माया जाल किया। उन लोगों के साथ। ताकि वो ट्रेन से उतर जाए। तभी उनको वहाँ एक आवाज सुनाई देती है- आखिर तुम लोग आ ही गए, तुम लोगो ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी थी।

यह भी जरुर पढ़े :-

आज मै तुम लोगो को छोड़ुगी। इतना कहकर सरिता की आत्मा अमन और राज को बुरी तरीके से मार देती है। उनके शरीर के टुकड़े टुकड़े कर देती है। उन लोगो की भयकर तरीके की मौत देखकर रमन माफी मागने लगता है – इन लोगो की बातो मे आकर मैने यह काम किया। वरना यह काम मे कभी भी नही करता। मैं तो अपने पिताजी को ढूँढने के लिए आया था। पर मुझे क्या पता था कि आज मेरी मौत आएगी। वरना मे कभी इस रास्ते पर नही आता।

सरिता की आत्मा बोलती – तेरे पिताजी मेरे पास है। वो देख तेरे पीछे।

रमन पीछे मुड़कर देखता उसके पिताजी बाहे फेलाए उसका इंतज़ार कर रहे थे।

सरिता की आत्मा बोलती – जिसे तरीके से मेरे पिता अपनी बेटी के लिए तड़प कर मर गए। उसी प्रकार तुम्हारे पिता अपने बेटे को मरता हुए देखेंगे। सरिता की आत्मा रमन के शरीर से तेजी से पार होकर गुजर जाती है, और उसके शरीर के छीतड़े हो जाते है। यह देखकर रमन के पिता पागल हो जाते है।

कहानी सुनाते हुए स्टेशन मास्टर नितिन को बोलता है – जो आदमी आज तुम्हे मिला था। वो कोई और नही, बल्कि रमन के पिता थे। आज भी बेटे को खो देने के गम मे पागल की तरह इधर उधर घूम रहे है।

तब तक नितिन की भी ट्रेन आ जाती है। और वो उसमे बैठकर मुंबई चला जाता है।

Bhutiya Kahani 1 भूतिया रेलवे स्टेशन का अंत :

दोस्तों उम्मीद करता हूँ की यह Bhutiya Kahani 1 भूतिया रेलवे स्टेशन आपको पसंद आई होंगी और काफी मजेदार लगी होंगी तो हम जल्द ही मिलते है अपनी अगली कहानी में .

आप चाहे तो हमारी यह कहानियां भी पढ़ सकते हैं  :-

आवश्यक सुचना :- यह Bhutiya Kahani 1 भूतिया रेलवे स्टेशन पूरी तरह काल्पनिक है यह Bhutiya kahani किसी भी अन्धविश्वास को बड़ावा देने के लिए नही लिखी गयी है इन्हें सिर्फ मनोरंजन के उद्देश्य से लिखा गया है |

1 thought on “👉 Bhutiya Kahani 1 भूतिया रेलवे स्टेशन 🔥”

Leave a Comment