Bhutiya Kahani | 1 Bhutiya Dukan

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Bhutiya kahani
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Bhutiya Kahani >> 1 Bhutiya Dukan का आरम्भ :

केक और पेस्टी खाना किसको पसंद नही होती हैं। बल्कि केक और पेस्टी खाना सबको पसंद होती है। लेकिन कभी आपने सोचा केक और पेस्टी बेचने वाला आपको ही मार दें तो क्या होगा। आज मे आपको ऐसी ही कहानी सुनाने जा रहा हु। केक और पेस्टी की शॉप ने कैसे दुर्गा की लाइफ बदल कर रख दी।

दुर्गा नाम की लड़की होती है, जिसको व्लॉग बनाना बड़ा पसंद होता है। वो अलग अलग रेसोरेंट पर जाकर खाने पर व्लॉग बनाती है। उनको social media पर डाल देती हैं। वो सभी खानो को टेस्ट करती है, फिर उनका रीव्यू देती है और लोगो से शेयर करती है। एक दिन उसके घर पर कोई नही होता था और उसे अपने 5 साल के छोटे भाई राज को स्कूल से लाना था।

उसी दिन उसे महफ़िल पेस्टी शॉप के खाने को रिव्यू करने का आमन्त्रित आया। दुर्गा उस महफ़िल पेस्टी शॉप को checkout करने के लिए बड़ी उत्साहित थी। क्योंकि वो पहले इंसान थी,जो उस बेकरी को रिव्यू करने वाली थी। स्कूल की छुट्टी हुई, वो राज को लेकर उस महफ़िल पेस्टी शॉप की तरफ चल पड़ी। राज जो पूरे दिन स्कूल की थकान से परेशान था, वो बार बार वो अपनी बहन दुर्गा को घर जाने के लिए कह रहा था।

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दुर्गा जिसके फॉलोवर्स पिछले 2 महीने मे बहुत कम हो चुके थे। उनको बढ़ाने के लिए उस महफ़िल पेस्टी शॉप पर वीडियो बनाना बहुत जरूरी था। वो राज को अलग अलग तरीके से चुप करवाकर गाड़ी चलाए जा रही थी। मैन रोड से हटकर वो लोग कच्चे रास्ते पर काफी देर से गाड़ी चला रहे थे। अब उन्हे बेकरी काफी दूर से दिखने लगी थी। राज जो इतनी देर से गाड़ी मे इधर उधर हो रहा था। उस बेकरी को देखकर अचानक से शांत हो गया था।

वो दोनों उस महफ़िल पेस्टी शॉप के पास पहुँचते है। दुर्गा ने गाड़ी पार की। राज के लिए दरवाजा खोला। लेकिन राज गाड़ी से उतरने को तैयार ही नही था। दुर्गा राज को बेकरी के अंदर मिलने वाली पेस्टी का लालच भी दिया। लेकिन राज अपनी सीट पर जैसे जमसा गया।बस वो महफ़िल पेस्टी शॉप के दरवाजे की ओर घूर-घूर देखे ही जा रहा था। दुर्गा ने उसे जोर हिलाया। फिर उसके बाद दुर्गा की तरफ देखकर बहुत जोर से रोने लगा।

वो बोलने लगा उसे बेकरी के दरवाजे पर आते आते उसे छोटे छोटे बच्चे दिखाई दिए थे। उन सभी बच्चो के कपडे खून से लथपथ हुए थे। वो सभी बच्चे दरवाजे पर खड़े थे और मुझे अंदर जाने से मना कर रहे थे। दुर्गा राज की बात सुनकर उसे समझ आ गया कि यह और कुछ नही, बल्कि पिछली रात को देखी गई हॉरर मूवी का नतीजा हैं। अपने भाई की एक ना सुनी।

अपने भाई का हाथ पकड़कर महफ़िल पेस्टी शॉप के दरवाजे की तरफ लेकर जाने लगी। वो दोनों बेकरी के अंदर आ गए, पर महफ़िल पेस्टी शॉप के अंदर कोई नही था। तभी वहाँ एक बूढ़ी औरत आती है। उसके हाथ मे एक प्लेट होती है उस प्लेट मे एक मीठा पेस्टी था। वो पेस्टी राज को देने लगी। राज उस मीठे पेस्टी को देखकर रोता हुआ अचानक से शांत हो गया। उस मीठे पेस्टी को मजे से खाने लग गया। तभी अचानक से एक बुढा आदमी आता है। वो दुर्गा का वेलकम करता है।

दुर्गा से बोलता है – अगर आपको कोई परेशानी हो रही है तो अंदर एक प्ले हाउस है। वहाँ पर बहुत सारे गेम है। आप अपने भाई को वहाँ पर भेज सकती हो।

दुर्गा मन ही मन सोचती है – यह बहुत ही अच्छा है। इससे मुझे वीडियो बनाने मे भी कोई प्रॉब्लम भी नही होंगी।

वो अपने भाई का हाथ पकड़कर उसे प्ले हाउस की तरफ उस बुढी औरत के पीछे पीछे जाने लग गई। फिर वहाँ उसे छोड़ देती है।

वो महफ़िल पेस्टी शॉप बहुत ही ज्यादा सुंदर थी। वहाँ पुरानी और महंगी चेयर, शानदार टेबल और सुंदर टाइट भी थी। पर पता नही वो सब दुर्गा के कैमरे मे अजीब सा दिख रहा था। वीडियो बनाकर उसे रिप्ले करके देखा,तो उस वीडियो मे कुछ छोटे की परछाई दिखाई दी। फिर अचानक से उसका फोन बन्द हो जाता हैं। दुर्गा को यह सब अजीब लगा।

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पर वो कुछ और सोचती तब तक वो बुढी औरत उसके पास आती है। उसे प्यार से चेयर पर बैठाती, फिर उसके बाद उसके सामने चॉकलेट पेस्टी रख देती है। उस चॉकलेट पेस्टी जैसी सुंदर पेस्टी दुर्गा ने पहले कभी नही देखी थी। उन पेस्टी को देखकर थोड़ी देर जो कुछ भी हुआ था। उन सब को भूलकर दुर्गा उस सॉफ्ट और स्वीट पेस्टी बड़े ही शौक से खाने लग गई।

दुर्गा उस पेस्टी को खा ही रही थी तभी वो बूढ़ी औरत और बुढा आदमी उसके सामने एक बड़ी- सी ढकी हुई प्लेट लेकर आ गए। इतनी बड़ी प्लेट देखकर दुर्गा को लगा, इसके अंदर बहुत ही स्पेशल डिश होगी। उन्होंने वो ढक्कन हटाया तो उसके अंदर दो बड़े बड़े बिस्कुट थे।

Bhutiya Kahani >> 1 Bhutiya Dukan का मध्य :

उन दोनों ने बोला यह हमारी बेकरी की स्पेशल मीट बिस्कुट है। इतना कहकर वो वहाँ से अपनी रसोई की तरफ चले जाते है। दुर्गा ने उस मीट बिस्कुट का एक टुकडा खाया। दुर्गा सोचने लगी, कोई इतनी टेस्टी मीट बिस्कुट कैसे हो सकती है। सोचते सोचते उसने एक बड़ा मीट बिस्कुट खा लिया। तभी उसको याद आता है कि वो खाने मे इतनी व्यस्त कैसे हो जाती है,कि अपने भाई राज को भूल ही गई थी। उसने सोचा यह बची हुई बिस्कुट ले जाकर अपने भाई राज को खिला देगी।

जब दुर्गा प्ले हॉउस मे पहुँचकर देखती है तो उसका भाई वहाँ नही होता हैं। दुर्गा अपने भाई को सब जगह पर देखती है। पर उसे अपना भाई कही पर नही मिलता है। तभी दुर्गा उस महफ़िल पेस्टी शॉप की रसोई मे जाकर देखती है। वो आश्चर्यचकित हो जाती है। वहाँ पर वो बुढा आदमी इंसानी दिल को काट रहा था। पास मे खड़ी वो बूढ़ी औरत उन टुकड़ों से बिस्कुट बना रही थी। यह सब देखकर दुर्गा घबरा जाती है।

तभी उसकी नजर रसोई के कोने मे जाती है, वहाँ पर उसका छोटा भाई बेजान सा जमीन पर पड़ा हुआ था। उसकी पूरी छाती पर कट लगे हुए थे। ऐसा लग रहा था कि उसकी छाती खोलकर उसका दिल निकाला गया है। दुर्गा को यह एहसास हुआ कि वो दिल जो बुढा आदमी काट रहा था। वो किसी और का नही बल्कि अपने छोटे भाई राज का ही था। यह सब देखकर दुर्गा की सास रुक गई और फिर अचानक से उसके मुह से जोर से चीख निकली। वो बूढ़े औरत और बूढ़े आदमी उसको देखकर अजीब तरीके से हँसने लगे।

दुर्गा घबरा गई और जल्दी से उस बेकरी के बाहर भागी। जैसे ही उसने उस महफ़िल पेस्टी शॉप से गाड़ी निकाली, तो उसको गाड़ी के मिरर मे कई सारे बच्चो की आत्मा दिखी। सबकी छाती पर बहुत सारे कट लगे हुए थे। जब उसने ध्यान से देखा तो उन बच्चों मे से एक उसका छोटा भाई राज था। राज का चेहरा देख दुर्गा का रोना ही छुट गया।

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मैन रोड पर ही पहुँचते ही उसकी गाड़ी का एसिडेंट हो जाता है। दुर्गा को हॉस्पिटल मे 5 दिन के बाद होश आया। उसके होश आते ही उसके मम्मी पापा फुट फुटकर रोने लगे। उन्होंने कहा – उसके एसिडेंट से पहले राज लापता है। और वो कही नही मिल रहा है।

दुर्गा ने अपने पैरेंट्स को महफ़िल पेस्टी शॉप मे जो हुआ वो सबकुछ बताया। महफ़िल पेस्टी शॉप के बारे मे सुनकर दुर्गा के पैरेंट्स का दिल दहल गया।

दुर्गा के पापा दुर्गा को बताते है – महफ़िल पेस्टी शॉप को बन्द हुए लगभग 15 साल हो गए है। पहले इस शॉप के मालिक छोटे बच्चो का दिल काटकर लोगो को खिलाते थे। जब इनकी किसी ने शिकायत की तो पुलिस उन्हे गिरफ्तार करने के लिए आती है। गिरफ्तार होने से पहले इस शॉप के मालिक और मालकिन दोनों ही आत्महत्या कर देते है। तब से यह शॉप बन्द है। अब तो वो महफ़िल पेस्टी शॉप खंडहर सी हो गई।

दुर्गा यह सब सुनकर आश्चर्यचकित हो जाती है। उसे यह सब तब तक यकीन नही होता,जब तक वो अपने पैरेंट्स के साथ जाकर उस महफ़िल पेस्टी शॉप को देख नही पाती। वो लोग वहाँ जाते है तो वो महफ़िल पेस्टी शॉप खंडहर सी हो रखी थी। जिसे देखकर दुर्गा की रूह काप गई। मन ही मन सोचती है यह सब कैसे हो सकता है?

तब से दुर्गा ने फूड व्लॉगिंग करना ही छोड़ दी। अपने छोटे भाई को खोने का दुःख शायद ही कभी दुर्गा के मन से निकल पाएगा।

Bhutiya Kahani >> 1 Bhutiya Dukan का अंत :

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आवश्यक सुचना :- यह Bhutiya Kahani पूरी तरह काल्पनिक है यह Bhutiya Kahani किसी भी अन्धविश्वास को बड़ावा देने के लिए नही लिखी गयी है इसे सिर्फ मनोरंजन के उद्देश्य से लिखा गया है |

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