👉 1 Bhutiya Hostel – Bhutiya Story in Hindi

दोस्तों इस Bhutiya Story in Hindi में आप एक Bhutiya Hostel की शानदार कहानी पढ़ेंगे | इस Bhutiya Story in Hindi ( Bhutiya Hostel ) को आप हमेशा याद रखेंगे, क्यूंकि हमारी जिन्दगी में कभी न कभी हम होस्टल जैसी जगहों पर जरुर रहे है आप इस कहानी से जरुर ही खुद से महसूस कर पाएंगे |

 Bhutiya Hostel - Bhutiya Story in Hindi
Bhutiya Hostel – Bhutiya Story in Hindi

👉 Bhutiya Hostel- Bhutiya Story in Hindi का आरम्भ :

कड़कड़ाती ठंडे के बीच जोरों की बर्फ बारी हो रही है। तभी हाईवे से कट मारती हुई एक गाड़ी चरचराती एक मुर्दाघर के पास आकर रुकती है। उस गाड़ी से एक औरत और आदमी निकलकर सीधे मुर्दाघर के अंदर चले जाते है। जहाँ पहले से एक पुलिस और एक मुर्दाघर का इनचार्ज भी था।

इंचार्ज बोलता है – ओ हों! यह तुम्हारा बेटा था। आओ मैं तुम्हारे बेटे की लाश बताता हु।

इतना बोलकर वो उन दोनों को लाश दिखाता है। वो लाश उन औरत और आदमी के बेटे संजय की होती है। लाश देखकर वो औरत चिल्लाती है – मेरा बेटा संजय! यह सब कैसे हुआ? पढ़ने के लिए गया था मेरा बेटा और लाश बनकर आ गया। ऐसा क्या है उस हॉस्टल में।

संजय के पापा – यह सब कैसे हुआ पुलिस इंस्पेक्टर। कल ही तो मैने अपने बेटा का हॉस्टल मे एडमिशन कराके लौटा है, तो फिर यह सब कैसे हुआ।

अपने जवान बेटे को खो देने की गम दोनों फुट फुटकर रोने लगे। पुलिस इंस्पेक्टर उन लोगो को संभालते हुए कहता है – मै आपके बेटे के हत्यारो को नही छोडूंगा। आप लोगो को न्याय दिलाकर रहूँगा।

तभी पास मे खड़े मुर्दाघर का इंचार्ज बोलता है – वो हॉस्टल एक भूतिया हॉस्टल है। वहाँ पर मौत का तांडव होता है। यह कोई पहली लाश नही है जो वहाँ से आई है। पहले भी कई मौते हो चुकी है वहाँ पर। पर यह आजतक कोई भी गुथी नही सुलझा पाया। जिसने भी कोशिश की उसने मौत ही पाई।

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पुलिस इंस्पेक्टर – चुप करो तुम। बकवास की बाते मत किया। मैं खुद उस हॉस्टल मे जाऊगा। और उस गुथी को भी सुलझाउगा। उन लोगों को जेल मे भेजुगा।

मुर्दाघर का इंचार्ज – जवान हो और जोश भी है। जाओ कर लो कोशिश। बाकी समझदार तो दूर ही रहते है।

इतना कहकर मुर्दाघर का इंचार्ज वहाँ से चला जाता है। जाते जाते उसने पुलिस इंस्पेक्टर विनीत को चैलेंज देकर जाता है। वो मन ही मन ठान लेता है। इस रहस्य का राज को सबके सामने लाकर ही रहूँगा।

अगले दिन पुलिस इंस्पेक्टर विनीत विक्टोरिया हॉस्टल मे कॉलेज स्टूडेंट बनकर जाते है। जैसे ही वहाँ पहुँचता है तो उसे वहाँ बहुत अजीब सा लगता है। और सोचता लगता है पहाड़ी के अन्त मे एक बड़ी खाई के पास भला कौन हॉस्टल बनाता हैं। और भला ऐसी जगह पर कोई अपने बच्चे को कैसे भेज सकता है? हॉस्टल भी एकदम विरान सा दिखाई देता हैं। जैसे विनीत हॉस्टल के अंदर जाने ही लगता है तभी पीछे से एक चौकीदार रोक देता हैं और बोलता है – कहाँ जा रहे हो बाबू?

विनीत(पीछे मुड़कर बोलता है) – एडमिशन लेने।

चौकीदार – एडमिशन लेना है तो रात मे आना। दिन मे यहाँ कोई काम नही होता।

विनीत(आश्चर्य चकित होकर) – क्या? दिन मे यहाँ कोई काम नही होता। पर क्यु?

चौकीदार – यह सब मुझे नही पता। बस नही होता है तो नही होता।

विनीत – बड़े ही अजीब नियम है। विनीत ने अपनी बात पूरी भी नही की। चौकीदार वहाँ से चला जाता है।

विनीत ने सोचा अगर पूरा सच जानना है तो मुझे यहाँ रुककर रात होने का इंतज़ार करना पड़ेगा। विनीत वही हॉस्टल के बाहर बैठे जाता है। फिर सुबह से शाम हो जाती है। लेकिन हॉस्टल मे अब भी किसी भी हलचल की आवाज नही आ रही थी। इतने में विनीत को पीछे से आवाज आती है। आजाओ बाबू एडमिशन लेलो।

विनीत को वो आवाज जानी पहचानी लगती है। जब वो देखता है तो सुबह जो चौकीदार मिला था वो ही चौकीदार अंदर खड़ा था। विनीत उस देखकर हैरान हो गया। सोचने लगा कि मै तो सुबह से यही बैठो हूँ, किसी को अंदर जाता नही देखा। तो यह अंदर कैसे गया?

चौकीदार बोलता है – क्या सोच रहे हो? एडमिशन नही लेना क्या?

विनीत – जी लेना है ना।

इतना कहकर वो चौकीदार के साथ हॉस्टल के अंदर चला जाता है। लेकिन यह क्या हॉस्टल अंदर भी एकदम सुनसान था। मानो जैसे कोई इसमें रहता भी नही।

चौकीदार उसे हॉस्टल के मालिक के पास ले जाता। और बोलता है – सर जी! इस लड़के को एडमिशन चाहिए इस हॉस्टल मे। इतना कहकर चौकीदार वहाँ से चला जाता है।

हॉस्टल के मालिक – अच्छा! यह फॉर्म भर दो। और यह अपने रूम की चाबी ले लो। बोर्ड पर कुछ नियम लिखे है, उन नियम को पढ़ लो।

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नितिन बोर्ड पर लिखे पढ़ने लगता है कुछ इस तरह के नियम थे
1) यहाँ कोई भी किसी से बात नही कर सकता है, सिर्फ अपने काम से मतलब रखना है।
2) भूलकर कर भी किसी के भी रूम मे नही जाना और न ही किसी को आने दे।
3) एकबार अपने कमरे मे जाने के बाद बाहर न निकले।

जैसे वो सारे नियम पढ़ता है और जोर से पीछे मुड़कर बोलता है। यह कैसे नियम है। लेकिन उस हॉस्टल का मालिक अपनी जगह पर नही था। कुर्सी भी खाली थी। न ही चोकीदार अपने गेट पर था। पुरा हॉस्टल मे सन्नाटा सा था।

नितिन अपने रूम की ओर चला जाता है। वहाँ जाकर देखता है तो सारे रूम बन्द थे। मानो कि वहाँ कोई रहता भी नही। वो अपने रूम मे चला जाता है और सारा सामान रख देता है। फिर अचानक से उसे किसी की आवाज आवाज सुनाई देती है। जैसे कोई जोर से चिल्ला रहा है। नितिन बाहर जाकर देखता है उसे कोई भी दिखाई नही देता।

नितिन – अरे! आवाज इतनी तेज आई। पर किसी ने गेट नही खोला। नितिन अपने सामने वाले रूम के पास जाकर जोर जोर से खटखटाने लगता है। पर किसी ने भी गेट नही खोला। फिर वो सबके गेट खटखटाने लगता है पर किसी एक ने भी गेट नही खोला। नितिन को बहुत ग़ुस्सा आया। गुस्से मे आकर उसने एक गेट तोड़ दिया।

गेट टूटने के बाद वो अंदर देखता है पुरा रूम सड़ा हुआ था। फर्नीचर बुरी तरीके से जले हुए थे। नितिन थोड़ा अंदर जाकर देखता है तो सामने एक जला हुआ लड़का जमीन पर पड़ा हुआ था।

नितिन यह देखकर डर जाता है। डर के मारे वो उस रूम के बाहर निकल जाता है। जैसे ही वो बाहर आता है, सब जगह आग की लपते लगी हुई थी। लोगो की चीखे की आवाज सुनाई दे रही थी। बचाओ बचाओ। उन चीखो को सुनकर गेट तोड़ने लगता है, जैसे ही गेट तोड़ा, आग की लिपटे उसे घेर देती है।

जिससे उसका शर्ट जलने लग गया। खुदको बचाते बचाते उसे पता भी नही चला सामने सीढ़िया भी थी। जोर से वहाँ से गिर जाता है। गिरते ही उसकी आग बुझ जाती है। गिरने से उसका शरीर बुरी तरीके से जख्मी हो गया। कैसे भी करके वो वहाँ से उठा। तो उसके सामने चोकीदार पीठ दिखाए खड़ा था।

नितिन चौकीदार से कहता है – यह आग कैसे लगी? यह सब कैसे हुआ?

जैसे ही चौकीदार उसके सामने देखता है उसका आधा शरीर जला हुआ रहता है।

नितिन चौकीदार से कहता है – अरे आप तो जल गए हो? चलो मैं आपको हॉस्पिटल लेकर चलता हूँ।

चौकीदार – अब बहुत देर हो गई। अब कुछ नही हो सकता।

नितिन – यह सब कैसे हुआ?
चौकीदार(नितिन का गला दबाते हुए कहता है) – 2 साल पहले मेरी हॉस्टल के सामने एक बहुत बड़ा हॉस्टल खोला था। उसका नाम भी विक्टोरिया हॉस्टल रख दिया। हमारे सारे स्टूडेंट को लालच देकर अपने हॉस्टल मे बुला देते।

मै और इस हॉस्टल के मालिक उस हॉस्टल के मालिक को हॉस्टल का नाम हटाने के लिए बोला। क्युकी हमारे हॉस्टल का विक्टोरिया था। उन्होंने भी अपने हॉस्टल का नाम विक्टोरिया रख दिया। वो मालिक मान जाता है और बोलता है। ठीक है मैं अपने हॉस्टल का नाम बदल देता हूँ।

इतना कहकर हम वापस आ जाते है। फिर हमारे हॉस्टल में एक लड़का आता है एडमिशन लेने के लिए। लेकिन वो लड़का उस दूसरे हॉस्टल के मालिक द्वारा भेजा गया एक जासूस था। जो हमारे हॉस्टल को बर्बाद करने के लिए आया था।

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वो लड़का हॉस्टल के सभी रूम को बाहर से लॉक कर देता है। उनके ऊपर केरोसिन छिड़क देता है और माचिस लगाकर जला देता है। रूम बन्द होने के कारण कोई भी भाग नही सका। सब रूम के अंदर ही जल गए। मै और मालिक उनको बचाने के लिए गए तो उस लड़का ने हॉस्टल को बाहर से ही बन्द कर दिया।

हम सब हॉस्टल के अंदर जल कर राख हो गए। हम लोगो ने बहुत कोशिश की पर कोई बच नही पाया। इसलिए जो भी लड़का इस हॉस्टल मे एडमिशन लेने के लिए आता है। हमे उसे मार देते है।

आज तु भी नही बचेगा।

नितिन – मुझे छोड़ दूँ। मै कोई स्टूडेंट नही बल्कि एक पुलिस वाला हूँ। मुझे जाने दो। अगर तुम मुझे छोड़ दोंगे तो मै वादा करता हूँ कि उस हॉस्टल के मालिक और उस लड़के को सलाको के पीछे छोड़ दूँगा। उन्हे फाँसी की सज़ा भी दिलवाउगा। मै आप सभी को न्याय दिलवाउगा।

वो चौकीदार उसे छोड़ देता है। नितिन पूरे सबूते के साथ न्यायालय जाकर उन लोगो पर मुकदमा दर्ज कराता हैं। उन लोगों को फासी की सज़ा भी दिला देता है।

👉 Bhutiya Hostel- Bhutiya Story in Hindi का समापन :

तो दोस्तों यह Bhutiya Story in Hindi ( Bhutiya Hostel ) आपको कैसी लगी उम्मीद करता हूँ की यह कहानी आपको पसंद आई होंगी , जल्द ही मिलते है हम अपनी नई कहानी में |

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आवश्यक सुचना :- यह Bhutiya Story in Hindi ( Bhutiya Hostel ) की कहानी पूरी तरह काल्पनिक है यह Bhutiya Story in Hindi ( Bhutiya Hostel ) की कहानी किसी भी अन्धविश्वास को बड़ावा देने के लिए नही लिखी गयी है इन्हें सिर्फ मनोरंजन के उद्देश्य से लिखा गया है |

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