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Bhutiya Story in Hindi >>Horror Metro Station

दोस्तों इस Bhutiya Story in Hindi की कहानी में हम एक Horror Metro Station की कहानी पढेंगे | यह कहानी काफी मजेदार है और आपको हमारी यह कहानी ( Horror Metro Station – Bhutiya Story in Hindi ) जरुर पसंद आएँगी और दोस्तों आप हमारे जरुर बताये की आपको यह कहानी कैसी लगी | चलिए शुरू करते है हमारी यह कहानी Horror Metro Station – Bhutiya Story in Hindi |

Bhutiya Story in Hindi
Bhutiya Story in Hindi

Horror Metro Station – Bhutiya Story in Hindi का आरम्भ :

आज से तीन साल पुरानी यह बात है। विनीत नाम का एक लड़का होता है। उसे एक ऐसा प्रोजेक्ट मिला होता है, जिससे उसका पूरा करिअर बन सकता है। इसलिए वो दिन रात उसी प्रोजेक्ट पर लगा रहता था। इस वजह से वो पिछले कई दिनों से आधी रात तक काम करता रहता था। अगर विनीत टाइम से निकलता तो वह घर जाने के लिए मेट्रो पकड़ लेता, वरना उसे कैफ लेनी पड़ती। उस दिन विनीत की बदकिस्मती थी, कि उस सर्द नवंबर की रात वो टाइम से निकला, नोएडा की तरफ जाती हुए आखिरी मेट्रो मे चढ़ गया।

जब वो स्टेशन पहुँचा तो ट्रेन के दरवाजे बंद हो रहे थे। मेट्रो की अनाउसमेंट स्टेशन पर बजी वो ट्रेन की तरफ तेजी से दौड़ा। इतनी ज्यादा ठण्ड थी कि उसकी सास भाप के रूप मे उसके मुह से निकल रही थी। हापते हुए सबसे पास वाले डब्बे मे आ गया। मेट्रो के दरवाजे उसके ठीक पीछे बन्द हुए। फिर वो सामने वाली सीट पर जाकर बैठ गया। विनीत की सास अब भी फूल रही थी।

फिर मेट्रो हल्के झटके के साथ शुरू हो गई। मेट्रो ने धीरे धीरे रफ्तार पकड़ी। मेट्रो मे बैठा विनीत ने नोटिस किया कि, उस मेट्रो मे उसके अलावा कोई भी पेसेंजर नही था। पूरी मेट्रो खाली थी। खाली मेट्रो को देखकर विनीत घबराने लगता है। उसकी दिल की धड़कन तेज होने लग गई। तभी मेट्रो के स्पीकर से अगले स्टेशन के लिए आवाज आती है। मेट्रो उस स्टेशन पर रुकती है, मेट्रो के सारे गेट खुल जाते है। तभी एक तेज हवा का झोंका मेट्रो के अंदर आता है। विनीत कपकपाने लग जाता है, ठंड की वजह से नही, बल्कि एक अधेड़ उम्र के आदमी को देखकर।

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वो आदमी एक लोहे की बेंच पर बैठा हुआ था। उस स्टेशन पर उसके अलावा कोई नही था। आँखे फाड़कर वो आदमी अपने सामने कई दूर देख रहा था। जैसे किसी ने उसको चौका दिया हो। उसकी बड़ी बड़ी आँखे काफी थी विनीत को डराने के लिए। पर जो देखकर उसकी रूह काफ उठी थी उसकी मुस्कराहट। एक कान से लेकर दूसरे कान तक फेली हुई बेजान मुस्कान। वो एक भयानक पुतले की तरह बैठा हुआ था।

बिना हिले डुले बस एक ही जगह पर बैठा हुआ था। ट्रेन की उस स्टेशन से निकलने तक ही वो आदमी वहाँ से बिल्कुल भी नही हिला। यहाँ तक की उसने अपनी पलके भी नही जपकाइ।

विनीत ने गहरी सांस ली। मुस्कराते हुए कहा कि कोई शराब पीकर बैठा। फिर तभी मेट्रो के स्पीकर से अगले स्टेशन की अनाउसमेंट आती है। अगला स्टेशन आने पर मेट्रो के दरवाजे भी खुल जाते हैं। पर इस बार तो विनीत के होश उड़ गए। विनीत के ठीक सामने वो बुढा आदमी फिर से उसी बेंच पर बैठा हुआ था। वही मुस्कान वही बड़ी बड़ी आँखे लिए हुए। ऐसा कैसे हो सकता है वो आदमी इतने जल्दी इस स्टेशन पर कैसे आ सकता है। तभी मेट्रो मे अनाउसमेंट होती है, पर विनीत का ध्यान नही होता।

Horror Metro Station – Bhutiya Story in Hindi का मध्य :

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जो आदमी उसके सामने बैठा था जो कही और देख रहा था, वो अचानक विनीत के सामने देखने लग जाता है। यह देखकर विनीत का दिल हथौड़े की तरह धड़कने लग गया। मेट्रो फिर एक झटके के साथ शुरू हो गई। विनीत ने सोचा अगर मेट्रो मे कोई पेसेंजर नही है तो ड्राइवर के पास तो जा सकता है। जैसे ही वो भागकर जाता है, कि अगले स्टेशन आ जाता। मेट्रो के दरवाजे खुल जाते है। विनीत बाहर देखता वही आदमी अब टेबल के किनारे खड़ा होता है और एक ही टक विनीत की ओर देखे जा रहा था।

लेकिन विनीत भागते हुए ड्राइवर के गेट के पास चला जाता है। बहुत तेजी से वो गेट खटखटा रहा था। लेकिन अंदर से कोई जवाब नही आया। तभी अगला स्टेशन आ जाता है। वो स्टेशन एकदम अधेरे से गिरा हुआ था। विनीत मेट्रो के अंदर उस आदमी को ढूंढ रहा था, पर उसे वो दिखाई नही दे रहा था। तभी एक रोशनी आती है, उस रोशनी मे वही बुढा आदमी दिखाई दे रहा था।

वो आदमी अजीब तरीके से चलकर मेट्रो की तरह आ रहा था। उसकी चाल एकदम पुतले की चाल की तरह थी। विनीत उसको देखकर बहुत ही ज्यादा डर जाता है। वो आदमी मेट्रो के अंदर आ जाता है। विनीत उस देखकर अपने साइड खाली डिब्बे की ओर दौड़ने लगता है। तभी उसका पैर फिसल जाता है वो वही पर गिर जाता है। उस मेट्रो की लाइट भी डिमडिमा रही थी। वो आदमी विनीत की ओर आ रहा था। उसे अपने ओर आते देख विनीत हार नही मानता, हिम्मत करके खड़ा होता है और दौड़ने लगता है।

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मन ही मन सोचने लगता है अगर मेट्रो का आखिरी डिब्बा आया तो क्या करेगा। वो आदमी उसे कई मार ना दे। मेट्रो का आखिरी हिस्सा भी आ जाता है। मेट्रो के स्पीकर मे अगले स्टेशन की अनाउसमेंट भी होती हैं। पर इस बार मेट्रो के गेट नही खुलते है। वो आदमी अब विनीत के ठीक सामने खड़ा होता है। विनीत मेट्रो की खिड़कियों से आवाज देने लगता है। तभी वो आदमी विनीत और करीब आ जाता है। उसके चेहरे पर अपना हाथ रखकर खरोंचने लगता है।

विनीत सोचने लगता है आज वो मर जाएगा। तभी स्टेशन आता है, मेट्रो के गेट खुल जाते है। विनीत मेट्रो के गेट बन्द होते उससे पहले भागकर मेट्रो से बाहर आ जाता हैं।

भागते हुए उस स्टेशन पर खड़े न ही सफाई कर्मचारी को देखता है। न ही उस स्टेशन पर दो खड़े पुलिस स्टाफ को देखता। बस सीधे उस स्टेशन के बाहर आ जाता। बाहर आकर वो गहरी सास लेता है। और पीछे मुड़कर देखता है तो मेट्रो उसी जगह पर खड़ी होती है। वहाँ से भागकर अपने घर की और चल देता है।

Horror Metro Station – Bhutiya Story in Hindi का समापन :

तो दोस्तों हमारी यह कहानी ( Horror Metro Station – Bhutiya Story in Hindi ) आपको कैसी लगी, उम्मीद करता हूँ की आपको अच्छी लगी होंगी | हमारी कहानी पढने के लिए आपका धन्यवाद |

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आवश्यक सुचना :- यह कहानी ( Horror Metro Station – Bhutiya Story in Hindi ) पूरी तरह काल्पनिक है यहकहानी किसी भी अन्धविश्वास को बड़ावा देने के लिए नही लिखी गयी है इन्हें सिर्फ मनोरंजन के उद्देश्य से लिखा गया है |

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